बुधवार, 9 जून 2010

दो पल जिंदगी



मै पल दो पल का शायर हूँ
पल दो पल मेरी कहानी है
पल दो पल मेरी हस्ती है
पल दो पल मेरी जवानी है

इस दो पल में कुछ जल्दी से 
मैंने हासिल करना चाहा 
कुछ थका हुआ था लहरों से 
सुस्ताने को साहिल चाहातुमने मुझको झकझोर दिया 
एक नई सीख सिखला दी है
 मत रुक बन्दे बस चलता जा 
आधे एक पल की आंधी हैइस पल के बाद एक पल है 
उस पल को चैन से जीऊंगा 
आराम से रोटी खाऊंगा 
और मीठा पानी पीऊंगापर इस पल मैं टकराऊंगा
 लहरों को सलामी भी दूंगा 
और इस पल में गर प्यास लगे 
खारा पानी ही पी लूँगा

मैं पल दो पल का शायर हूँ
 पल दो पल मेरी कहानी है 
पल दो पल मेरी हस्ती है 
पल दो पल मेरी जवानी है

2 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर अभिव्यक्ति ....


    मंगलवार 15- 06- 2010 को आपकी रचना (मेरी क्या खता है )... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है


    http://charchamanch.blogspot.com/

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