आपकी नजर में सबसे बड़ा रोग क्या है? .........
जरा जोर दीजिये.............नहीं बोल सकते .......खैर ये तो अपने-अपने सोचने के तरीके पे निर्भर करता है। पता नहीआप कोई ऐसी चीज़ बोल दें की मुझे अपने विषय को छोडना पड़ जाए।
भाई मेरे हिसाब से सबसे बड़ा रोग हीन भावना है। और सबसे बड़ा रोगी हीन भावना से ग्रसित व्यक्ति है। एक यहीऐसा रोग है जो अच्छे खासे कौवे को चूहा बना सकता है। अगर एक बार ......भगवान् न करे ...आप इस रोग कीचपेट में आ गए तो फिर आप कही के न रहेंगे। आप देखेंगे कि आप धीरे धीरे लोगों पर भी विश्वास करना कम करदेंगे। फिर आप चिडचिडे पन कि तरफ़ रुख करेंगे, आपके कुछेक सम्बन्धी आपके करीब रह जायेंगे और आपभयग्रस्त हो जायेंगे कि कहीं ये भी आपको न छोड़ दें। खुशी आपको खुश न कर पाएगी। और दुःख आपसे परेशानरहेगा। जो चीज़ें जीवन में रस घोलतीं हैं जैसे कि प्रेम, भाईचारा आपसे मुंह छुपाते फिरेंगे। फिर बारी आएगी अन्यरोगों के गृहप्रवेश की। क्रोध, इर्ष्या, कुंठा आदि।
अरेरे ..........ये क्या, अब तो बरबाद हो गए। पलट के देखिये कुछ तो बचा होगा........कुछ भी नही .........ये क्याहुआ? अरे एक बार फिर देखिये, अब नही देखा जाता ? अरे ये आप कहाँ चल दिए ...........अरे रुकिए, आत्महत्यापाप है , अरे रुकिए अपने लिए न सही अपने परिवार के लिए , अपनी माँ के लिए
........क्या कहा? क्योँ ? क्या कर सकता उसके लिए जीके ? क्या दे सकता हूँ उसे ?
अच्छा अपने बाप के लिए ...
........अरे अब नही देखा जाता ! उसने मेरे लिए क्या नहीं किया पर मैं उसकी उम्मीदों पर कभी खरा न उतरा।
अच्छा अपनी बहन के लिए......
मत याद दिलाओ उसका मासूम चेहरा! कितना विवश और कमजोर भाई दिया उसे भगवान् ने।
अपने भाई के लिए........
............वह मुझसे लाख गुना ज्यादा समर्थ है। मैं नही चाहता कि उस पर बोझ बनूँ। भगवान् उसे बड़ा आदमीबनाये।
तो आप नही मानेंगे .............
........मैं कहीं का नही रहा। मेरा चले जाना ही ठीक है ...
अच्छा ज़रा उनसे भी तो मिल लीजिये।
कौन है वह ?
अरे आप पहचानते नही ? ये वो हैं जिनने तुम जैसे कितनो को सहारा दिया। तुम्हे भी संभालेंगी।
पर ये हैं कौन?
ये वो हैं ......जिनने सिकंदर को कभी न भूला जा सकने वाला बादशाह बना दिया। ये आशा हैं।