शनिवार, 1 मई 2010

मेरी क्या खता है ?


उठते है कदम, बढ़ते हैं कदम,एक रास्ता है जिंदगी
इस रास्ते में कुछ पड़ाव,नाम है.. गम और ख़ुशी
मैं चल रहा हूँ रास्ते में,काफिले मिल जाते हैं
मेरी तरह कुछ और
मुसाफिर वहाँ मिल जाते हैं
कोई हंस दिया कोई रो दिया,कुछ ने सुना दी दास्तान
मैंने कहा उसने सुना,उसने कहा मैंने सुना
कुछ देर का आराम मुझको,आज भारी पड़ गया
ठंडक सुबह की रही,अब सूर्य ऊपर चढ़ गया
इस धूप में वो क्यूँ चले,वो सो रही है छांह में
और छोड़ के उसको अकेला,चल दिया मैं राह में
अब उसे जो याद आऊं
मैं, तो मेरी क्या खता है
कह दो उसको भूले मुझको,जिंदगी एक रास्ता है
मैं हूँ सही या हूँ गलत,ये खुदा मेरा जानता है
ये जान लो, ये मुसाफिर
अच्छा-बुरा पहचानता है

शनिवार, 17 अप्रैल 2010

एक कोशिश

हंस के देख दे तू एक बार मेरी तरफ,
तेरी तस्वीर मेरे दिल में रहेगी हरदम
दो लफ्ज़ प्यार के नहीं तो ताने ही सही
तेरी चुप्पी मगर नहीं सुन सकता इस दम


मैंने माना के मेरे पास है रंगों की कमी
और रंगों में तेरी जिंदगी रहती है रमी
रंग अच्छे हैं मगर मुझे तो चिढाते हैं
मेरा वादा है मैं सफ़ेद रहूँगा हरदम

मेरा मिलना तुझे मिलना न लगे मुमकिन है
मेरी बातों में तुझे कुछ न मिले मुमकिन है
ये भी है मुमकिन मैं तुझे हंसा न सकूं
तेरी हंसी लेकिन कैद रखूँगा हरदम

हंस के देख दे तू एक बार मेरी तरफ,
तेरी तस्वीर मेरे दिल में रहेगी हरदम

शुक्रवार, 20 नवंबर 2009

रोगी

आपकी नजर में सबसे बड़ा रोग क्या है? .........
जरा जोर दीजिये.............नहीं बोल सकते .......खैर ये तो अपने-अपने सोचने के तरीके पे निर्भर करता है। पता नहीआप कोई ऐसी चीज़ बोल दें की मुझे अपने विषय को छोडना पड़ जाए।

भाई मेरे हिसाब से सबसे बड़ा रोग हीन भावना है। और सबसे बड़ा रोगी हीन भावना से ग्रसित व्यक्ति है। एक यहीऐसा रोग है जो अच्छे खासे कौवे को चूहा बना सकता है। अगर एक बार ......भगवान् करे ...आप इस रोग कीचपेट में गए तो फिर आप कही के रहेंगे। आप देखेंगे कि आप धीरे धीरे लोगों पर भी विश्वास करना कम करदेंगे। फिर आप चिडचिडे पन कि तरफ़ रुख करेंगे, आपके कुछेक सम्बन्धी आपके करीब रह जायेंगे और आपभयग्रस्त हो जायेंगे कि कहीं ये भी आपको छोड़ दें। खुशी आपको खुश कर पाएगी। और दुःख आपसे परेशानरहेगा। जो चीज़ें जीवन में रस घोलतीं हैं जैसे कि प्रेम, भाईचारा आपसे मुंह छुपाते फिरेंगे। फिर बारी आएगी अन्यरोगों के गृहप्रवेश की। क्रोध, इर्ष्या, कुंठा आदि।

अरेरे ..........ये क्या, अब तो बरबाद हो गए। पलट के देखिये कुछ तो बचा होगा........कुछ भी नही .........ये क्याहुआ? अरे एक बार फिर देखिये, अब नही देखा जाता ? अरे ये आप कहाँ चल दिए ...........अरे रुकिए, आत्महत्यापाप है , अरे रुकिए अपने लिए सही अपने परिवार के लिए , अपनी माँ के लिए
........क्या कहा? क्योँ ? क्या कर सकता उसके लिए जीके ? क्या दे सकता हूँ उसे ?
अच्छा अपने बाप के लिए ...
........अरे अब नही देखा जाता ! उसने मेरे लिए क्या नहीं किया पर मैं उसकी उम्मीदों पर कभी खरा उतरा।

अच्छा अपनी बहन के लिए......
मत याद दिलाओ उसका मासूम चेहरा! कितना विवश और कमजोर भाई दिया उसे भगवान् ने।

अपने भाई के लिए........
............वह मुझसे लाख गुना ज्यादा समर्थ है। मैं नही चाहता कि उस पर बोझ बनूँ। भगवान् उसे बड़ा आदमीबनाये।
तो आप नही मानेंगे .............
........मैं कहीं का नही रहा। मेरा चले जाना ही ठीक है ...


अच्छा ज़रा उनसे भी तो मिल लीजिये।
कौन है वह ?
अरे आप पहचानते नही ? ये वो हैं जिनने तुम जैसे कितनो को सहारा दिया। तुम्हे भी संभालेंगी।
पर ये हैं कौन?
ये वो हैं ......जिनने सिकंदर को कभी भूला जा सकने वाला बादशाह बना दिया। ये आशा हैं।

शनिवार, 24 अक्टूबर 2009

व्यथा

गंभीरता की बातों को मजाक में लेना अपनी ही हँसी उड़ने जैसा है।............वैसे तो, परिस्थिति भी जिम्मेदार है कीआप बात कह किसके सामने रहे हैं, उसकी प्रकृति क्या है, क्या वह विनोदी स्वाभाव वाला है? अगर हाँ तो ये आपकादोष है। ऐसे लोगों के सामने आप अपनी समस्या या गंभीर प्रश्नों को लेके ना बैठे । क्योँ की विनोदी जीव इश्वर कीइच्छानुसार कभी भी गंभीर न होने के लिए ही अस्तित्वा में आया है।

अब रही बात आपके प्रश्नों की तो विश्वास रखें आप ही उनका सटीक उत्तर दे सकतें हैं।

ये तो एक प्रकृति हैं, इससे कोई खतरा नही, और न ही ऐसे लोगों से नाराज होने की जरुरत हैं। जरा दुसरे किस्म केलोगों से सावधानी रक्खें। ये एक बार आपकी कोई भी समस्या सुन सकतें हैं और आपको सलाह भी दे सकतें हैंलेकिन आपको कमजोर भी समझ सकतें हैं। अगर आप किसी ऐसे प्रकृति के जीव को अपना मानतें हैं और चाहतेंहैं की वह भी आपका सम्मान करें तो कृपया उसे अपना कोई दुःख न सुनाएं। याद रखें मन की पीड़ा कह देने से कभीकम नहीं होती।

अगर किसी से कहना ही हैं तो ऐसे आदमीं से कहिये जिस पर आपको ख़ुद से ज्यादा विश्वास हैं। आप या तो पाएंगेकी आपकी समस्या हल हो गयी, नही तो आपका दर्द जरूर कम हो जाएगा। क्यों की आप ख़ुद को अकेला नहींपायेंगे।