शनिवार, 11 अगस्त 2012

चाहत...एक उमंग !

ऐसा अक्सर होता है...की हम कुछ चाहते हैं और वो हमें नहीं मिलता....कुछ लोग कम कोशिश करके भी उसे हासिल कर लेते हैं! और किसी किसी को वो चीज़ बिना चाहे भी मिल जाती है!

ये सब देख के, मायूसी बढती जाती है. आप कहेंगे...कैसे कैसों को दिया है, ऐसे वैसों को दिया है. मगर जो इसके लायक हैं उन्हें ही मिलता है, ये सच है. उन्हें उसके बिना भी जीना आता है. कुदरत चाहती है की आप उसकी दी हुई हर चीज़ से प्यार करें...इससे एक संतुलन बनता है.

जो आपके पास पहले से है, जब वो आपको खुश नहीं कर पा रहा तो इसकी क्या गारंटी है कि जिसे आप चाहते हैं उसे पाके आप खुश रहेंगे, आखिर उसके बाद भी तो आप कुछ और चाहेंगे. चाहतें ख़त्म नहीं होती.

मैं ये नहीं कहता कि चाहत नहीं होनी चाहिए. इसका आपकी मौजूदा जिंदगी पे बुरा असर नहीं होना चाहिए. चाहत एक नयी सोच देती है, नया काम देती है, एक नयी उमंग देती है. और बिना उमंग की जिंदगी बेकार है....इसलिए चाहत होनी चाहिए.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें